भविष्य के नाम: एक पत्र
भविष्य के लिए एक पत्र ( A Letter For Future) प्रिय, यह पत्र मैं, सितंबर 2025 से, तुम्हारे नाम लिख रहा हूँ। मैं नहीं जानता कि तुम इसे कब पढ़ोगे—शायद दस साल बाद, या शायद एक सदी बाद। लेकिन इसे लिखते हुए मेरे शब्दों का वजन मेरे हृदय से कहीं ज्यादा भारी है, क्योंकि यह एक क्षमा-याचना से ज्यादा, एक आत्मस्वीकारोक्ति है। कैसी है तुम्हारी दुनिया की तस्वीर? क्या वहाँ शुद्ध हवा में साँस लेना अब भी एक हक़ है, या केवल ख़्वाब ? क्या तुम नदियों का स्वच्छ पानी पीते हो या फिर उसे शुद्ध करने का पैसा खर्च करते हो? क्या तुम्हारे समाज में इंसानियत अब भी उसकी धड़कन तलाशती है? या फिर... हमने जो गलतियाँ कीं, उनकी सजा का कर्ज तुम आज भी चुका रहे हो? मैं उस दौर से लिख रहा हूँ जहाँ हमारे पास विकल्प थे, मगर समझ की कमी थी। (यह कहना गलत नहीं होगा कि समझ तो थी — AI का युग शुरू हो चुका है, ऐसा लगता है जल्द ही कई जगहों पर AI और रोबोट्स हमारी जगह ले लेंगे। टेक्नोलॉजी पहले से कहीं बेहतर है, परन्तु क्या हमारी मानवता उसी रफ़्तार से विकसित हो पा रही है?) “हम...